मुंबई लोकल यानी खतरों का सफर: पत्नी कहती है- सावधानी से जाना सुरक्षित आना
मुंबई लोकल मेरे लिए सिर्फ एक ट्रेन नहीं, बल्कि रोज़ी-रोटी तक पहुंचने का जरिया है. लेकिन हर दिन इस "लाइफलाइन" में सफर करना अब जिंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा बन गया है.
लोकल में चढ़ना किसी युद्ध से कम नहीं. कई बार तो ट्रेन में घुसने के लिए दौड़ना पड़ता है, किसी का बैग चेहरे पर लगता है, किसी की कोहनी पसलियों में. अंदर पहुंच भी गए तो सांस लेने की जगह नहीं. और अगर जगह नहीं मिली तो दरवाजे पर खड़े होकर सफर करना मजबूरी बन जाता है.
2025 में मुंबई लोकल में 2287 यात्रियों की मौत यही मजबूरी हर साल सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है. सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के अनुसार वर्ष 2025 में मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 2,287 यात्रियों की मौत हुई, यानी औसतन हर दिन छह से अधिक लोगों की जान गई. इनमें बड़ी संख्या चलती ट्रेन से गिरने, ट्रैक पार करने और अन्य रेल हादसों की थी. हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में मौतों में कुछ कमी दर्ज हुई, लेकिन आंकड़े आज भी बेहद चिंताजनक हैं.
मुंबई लोकल को देश की सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल सेवा कहा जाता है. रोज़ाना 70 लाख से अधिक यात्री इस नेटवर्क पर सफर करते हैं. लेकिन इसी लाइफलाइन पर हर साल हजारों परिवार अपनों को खो देते हैं.
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