सारस एक्सप्रेस। गोंदिया
सरकार की ओर से मामा अर्थात माजी मालगुजारी तालाबों का पुनर्जीवन करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे है। लेकिन विभाग की अनदेखी व ठेकेदारों की मनमानी के कारण पुनर्जीवन योजना को ग्रहण लग गया है। पिंडकेपार मामा तालाब का गहराईकरण तथा दुरूस्ती की गई। लेकिन निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती जाने से तालाब का पानी नाले में बह गया है। जिससे ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ तीव्र आक्रोश निर्माण हो गया है। मांग की जा रही है की उपरोक्त तालाब निर्माण कार्य की जांच कर अधिकारी तथा संबंधित एंजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस संदर्भ में उप विभागीय अभियंता जल संधारण से संपर्क किया गया तो उनकी ओर से किसी भी प्रकार का प्रतिसाद नहीं दिया गया।
बता दें की जिला जल संधारण लघु सिंचाई विभाग जिला परिषद गोंदिया की ओर से जिले के मामा तालाबों का पुनर्जीवन व दुरूस्ती के काम किए जा रहे है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है की तालाब का गहराईकरण तथा दुरूस्ती होने से तालाब में जल संग्रहण बना रहेगा। जिसका लाभ ग्रामीणों के साथ किसानों की खेती को मिलेगा। जिले में करोड़ों रूपए की लागत से तालाब पुनर्जीवन के काम किए जा रहे है। गोरेगांव तहसील के पिंडकेपार में छोटा तालाब, सावरा तालाब तथा बड़े तालाब का पुनर्जीवन व दुरूस्ती का काम किया गया लेकिन छोटे तालाब के रपटे (वेस्ट वेअर पिचिंग) के निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर अनियमितता बरती गई है। जिससे तालाब का पानी निर्माणाधीन रपटे से नाले में बह गया है। पहले तालाब में 7 से 8 फीट पानी भरा रहता था। अब तालाब में दो से ढाई फीट ही पानी का संग्रहण हो रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है की जो रपटा बनाया गया है वह रपटा काफी नीचे है। इतना ही नहीं तो जितना गहराईकरण होना था उतना गहराईकरण हुआ ही नहीं और तालाब के पार पर मिट्टी डालकर निर्माण कार्य को पुरा होने का दर्शा दिया गया है। तालाब का पानी बह जाने से ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ आक्रोश निर्माण हो गया है।
शासन को राजस्व का नुकसान
छोटे तालाब की नीलामी ग्राम पंचायत के माध्यम से की जाती है। जिससे हजारों रूपए का राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन पुनर्जीवन दुरूस्ती योजना के तहत काम करने से अब इस तालाब में पानी संग्रहित होने के बजाए नाले में बह रहा है। जिस वजह से मछली पालन नहीं किया जा सकता और ना ही अन्य कामों के लिए किया जा सकता है।
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