सारस एक्सप्रेस। गोरेगांव
जनप्रतिनिधियों के झूठे वादे और सरकारी तंत्र की अनदेखी से ग्रामीणांे में काफी नाराजगी छा गई है। कमरगांव-म्हसगांव मार्ग की हालत इतनी बदहाल हो गई की अब वहां से पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। इस सडक को बनाने में प्रशासन और जनप्रतिनिधि असफल हो गए है। जिसे देखते हुए अब ग्रामीणों ने स्वयं कमान संभाल ली है और दानवीरांे के सहयोग से सडक का निर्माण करने का निश्चय कर लिया है। सरकारी सडक के निर्माण के लिए अब दानवीरों ने सडक पर निर्माण सामग्री डालना भी शुरू कर दिया है। यह एेतिहासिक फैसला सरकार व जनप्रतिनिधियांे के लिए सबक सिखाने जैसा है।
बता दे की गोरेगांव तहसील अंतर्गत कमरगांव-म्हसगांव मार्ग आता है जो गोरेगांव तहसील मुख्यालय को जोड़ता है। यह सडक जिला परिषद के निर्माण कार्य विभाग के नियंत्रण में आता है। क्षेत्रवासियों ने कई बार जन प्रतिनिधि तथा प्रशासन के अधिकारियों से सडक के गढ्ढे बुझाने तथा नई सडक निर्माण करने की गुहार लगाई। लेकिन कई वर्ष बीत गए लेकिन न तो सडक के गढ्ढे बुझाए गए और ना ही नई सडक तैयार करने के िलए मंजूरी दी गई है। अब यह सडक पगडंडी में तब्दील होने से इस सडक से गुजरना मुश्किल हो गया है। जिसे देखते हुए ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है की दानवीर और समाज सेवियांे से सडक निर्माण की सामग्री लेकर श्रमदान से सरकारी सडक का निर्माण किया जाएगा। इस फैसले के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं समाज सेवियों ने लाखों रूपए की निर्माण सामग्री सडक पर डालना शुरू कर दिया है। यह निर्णय प्रशासन व जनप्रतिनिधियांे के लिए किसी सबक से कम नहीं है।
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👉यह समाज सेवी आए आगे
ग्रामीणों द्वारा किए गए आव्हान पर क्षेत्र के कई दानवीर तथा समाज सेवी निर्माण सामग्री लेकर सडक पर पहुंच गए। जिसमें पूर्व पंस सभापति मनोज बोपचे, इंजी. आनंद चंद्रिकापुरे, संजय बारेवार, पूर्व सरपंच सोमेश रहांगडाले, काशीनाथ भंेडारकर, फनींद्र पटले आदि का समावेश है। इन्हांेने गिट्टी, मुरूम तथा अन्य आवश्यक सामग्री सडक पर जमा कर दी है। अब ग्रामीण जल्द ही श्रमदान कर नई सडक का निर्माण करेंगे।
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